बाल विकास की अवस्थाएँ

बाल विकास की अवस्थाएँ

डॉ. अर्नेस्ट जोन्स द्वारा बाल विकास की अवस्थाओं को चार भागों में बाँटा गया है-

(1) शैशवावस्था (जन्म से 5-6 वर्ष)
(2) बाल्यावस्था (बाल्यावस्था 6-12 वर्ष)
(3) किशोरावस्था (12-18 वर्ष)
(4) प्रौढ़ावस्था (18 वर्ष के बाद)

                                              (जीवन का सबसे महत्वपूर्ण काल)

(1) शैशवावस्था (Infancy)- 

(जन्म से 5-6 वर्ष तक) शैशवावस्था की कुछ प्रमुख एवं महत्वपूर्ण बातें निम्नलिखित हैं-

(1) शैशवावस्था में सबसे तेज शारीरिक विकास होता है।

(2) शैशवावस्था में बालक में शब्दों को बार-बार दोहराने की प्रवृत्ति पायी जाती है।
(3) इस अवस्था में बालक जिज्ञासु प्रवृत्ति का होता है।
(4) शैशवावस्था में बालक में स्वप्रेम की भावना अत्यधिक होती है।
(5) शैशवावस्था से मुख्यतः चार संवेग पाए जाते हैं- भय, 2. क्रोध, 3. प्रेम, 4. पीड़ा।
(6) शैशवावस्था में नैतिक भावना का अभाव पाया जाता है।
(7) शैशवावस्था में सामाजीकरण की प्रक्रिया का आरम्भ होता है।
(8) शैशवावस्था में बालक मूल प्रवृत्यात्मक व्यवहार करता है।

 

(2) बाल्यावस्था (Childhood)- प्रमुख विशेषताएँ-

(1) बाल्यावस्था 6-12 वर्ष के बीच की अवस्था को कहा जाता है।
(2) बाल्यावस्था को दो भागों में बाँटा गया है-

(a) पूर्व बाल्यावस्था (b) उत्तर बाल्यावस्था

(3) बाल्यावस्था में बालक बाह्य केन्द्रित होता है।
(4) बाल्यावस्था में बालक में संग्रह करने की प्रवृत्ति पायी जाती है।
(5) बाल्यावस्था में बालक में सामूहिक प्रवृत्ति की प्रबलता होती है।
(6) बाल्यावस्था में बालक सामूहिक खेलों में विशेष रुचि लेता है।
(7) बाल्यावस्था में बालक की स्थायी स्मृति में वृद्धि होती है।
(8) बाल्यावस्था को समूह की आयु, चुस्ती की आयु एवं गंदी आयु भी कहा जाता है।

 (3) किशोरावस्था (Adolescence)- (12-18 वर्ष की आयु तक)

(1) किशोरावस्था में बालक का शारीरिक, मानसिक, सामाजिक विकास पूर्णतया हो जाता है।
(2) किशोरावस्था में आवेगों की तीव्रता स्थिति उत्पन्न होती है।
(3) किशोरावस्था को परिवर्तन की अवस्था भी कहा जाता है।
(4) किशोरावस्था में विषमलिंगी आकर्षण होता है|
(5) किशोरावस्था में बालक में कल्पना की बहुलता होती है।
(6) किशोरावस्था को उथल-पुथल की अवस्था भी कहा जाता है।
(7) किशोरावस्था तनाव और परेशानी की भी अवस्था है।
(8) किशोरावस्था में आत्मसम्मान की भावना प्रबल होती है।

महत्वपूर्ण कथन

शैशवावस्था-

(1) मनुष्य को जो कुछ बनना होता है प्रारंभ के चार-पाँच वर्षों में बन जाता है-    फ्रायड
(2) शैशवावस्था द्वारा जीवन का सारा क्रम निश्चित होता है                                -एडलर
(3) 20 वीं शताब्दी को बालक की शताब्दी (शिशु शताब्दी) कहा है                -क्रो व क्रो ने
(4) व्यक्ति का जितना भी मानसिक विकास होता है उसका आधा तीन वर्ष
की आयु तक हो जाता है                                                                              -गुडएनफ
(5) बालक प्रथम 6 वर्षों में बाद के बारह वर्षों से दूना सीख लेता है                      -गेसेल

 बाल्यावस्था-


(1) बाल्यावस्था को जीवन का अनोखा काल किसने कहा है  –              -Cole & Bruce ने
(2) बाल्यावस्था को “मिथ्या परिपक्वता” का काल कहा है    –                       -Ross ने
(3) खेलो द्वारा व्यक्ति अपने भावी जीवन की तैयारी करता है –                  -कार्ल ग्रूस ने
 

किशोरावास्था


(1) किशोरावस्था को जीवन का सबसे कठिन काल कहा है –                  किल पैट्रिक ने
(2) किशोरावस्था बड़े संघर्ष तूफान तथा विरोध की अवस्था है –                 स्टेनले हॉल
(3) किशोरावस्था बाल्यकाल तथा प्रौढ़ावस्था के मध्य का संक्राति काल           -कुल्हन 

3 Comments

    1. 18 वर्ष के बाद की अवस्था को जॉन्स ने प्रौढ़ावस्था में रख दिया है तो प्रौढ़ावस्था विकास की अंतिम अवस्था है

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