Cell Structure and Function| study of Cytology

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Cell Structure and Function

कोशिका सभी जीवों की संरचनात्मक तथा कार्यात्मक इकाई है। सन् 1665 में रॉबर्ट हुक नामक अंग्रेज वैज्ञानिक ने कोशिका की खोज की। दो जर्मन वैज्ञानिकों श्लाइडेन (Schleiden; 1839) तथा श्वान (Schwann: 1838) ने कोशिकावाद का प्रस्ताव दिया, जिसके अनुसार

(i) सभी जीवधारी कोशिकाओं व कोशिकाओं के उत्पादों से बनते हैं।
(ii) कोशिकाएँ जीवधारियों की मूलभूत संरचनात्मक इकाइयाँ हैं।

Structure of Cell (कोशिका की संरचना )

सन् 1932 में जर्मनी के दो वैज्ञानिकों नॉल (Knoll) व रस्का (Ruska) ने एक ऐसे सूक्ष्मदर्शी का आविष्कार किया, जिससे वस्तु एक लाख (100000) गुना बड़ी दिखाई पड़ती है। इसे इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी (electron microscope) कहते हैं। इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी द्वारा देखने पर जन्तु एवं पादप कोशिका चारों ओर से प्लाज्मा कला से घिरी होती है। पादप कोशिका में प्लाज्मा कला के अतिरिक्त कोशिका भित्ति भी पाई जाती है।

Cell Membrane or Plasma Membrane

(कोशिका कला या प्लाज्मा झिल्ली )

कोशिका के सभी अवयव एक पतली झिल्ली द्वारा घिरे रहते हैं। इस झिल्ली को कोशिका कला या प्लाज्मा झिल्ली कहते हैं। इस झिल्ली के द्वारा ही कोशिका अपने बाहरी वातावरण से अलग बनी रहती है। यह लिपोप्रोटीन की बनी होती है। कोशिका कला की संरचना के लिए विभिन्न मत प्रतिपादित किए गये, जिनके तरल मोजैक मॉडल सर्वमान्य है।

तरल मोजैक मॉडल (Fluid Mosaic Model)

इस विचारधारा को सिंगर तथा निकोलसन (सन् 1972) ने प्रस्तुत किया। इसके अनुसार, कोशिका कला के मध्य में लिपिड का दोहरा स्तर होता है। इस स्तर के बाहर परिधीय या बाह्य (extrinsic) प्रोटीन तथा धंसे हुये समाकल (intrinsic) प्रोटीन होते हैं।

Functions of Cell Membrane (कोशिका कला के कार्य )

(i) यह कोशिकाद्रव्य (cytoplasm) तथा कोशिकांगों के लिए सुरक्षा कवच का कार्य करती है।
(ii) यह चयनात्मक पारगम्यता (selective permeability) दर्शाती है अर्थात् किन लाभदायक अणुओं को अन्दर रहना है तथा किन हानिकारक अणुओं को बाहर जाना है, इसका चयन कोशिका कला ही करती है।

कोशिका भित्ति (Cell Wall)

यह पौधों को मजबूती प्रदान करती है। कोशिकागों मित्ति में सेलुलोज से बने माइक्रोफिबिल्स तथा अन्य पॉलीसैकेराइड भी उपस्थित होते हैं, इसका प्रमुख कार्य कोशिकाद्रव्य एवं कोशिका झिल्ली को बाह्य आघातों से सुरक्षित रखना होता है।

Cell Organelles : Structure and Functions

(कोशिकांगःसंरचना व कार्य )

कोशिका का इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी द्वारा अवलोकन करने पर निम्न कोशिकांग पाए जाते हैं

Cell Organelles

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1. केन्द्रक (Nucleus)

इसकी खोज (सन् 1831) में स्कॉटिस वैज्ञानिक रॉबर्ट ब्राउन ने की थी। सभी यूकैरियोट जीवों में एक सुस्पष्ट केन्द्रक (nucleus) होता है, जो दोहरी झिल्ली से घिरा होता है। इस केन्द्रक झिल्ली में केन्द्रकीय छिद्र होते हैं। गुणसूत्रों के अलावा यह झिल्ली एक या ज्यादा केन्द्रिकों (nucleoli) को भी घेरे रहती है, जो केन्द्रकद्रव्य में डूबे रहते हैं। केन्द्रिक राइबोसोमक आरएनए संश्लेषण का केन्द्र है, जबकि केन्द्रक सभी कोशिकीय क्रियाओं का नियन्त्रण केन्द्र है, जिससे आनुवंशिकता (heredity) नियन्त्रित होती है।

2. माइटोकॉण्ड्रिया (Mitochondria)

माइटोकॉण्ड्रिया दोहरी झिल्ली के आवरण से घिरी हुई रचनाएँ होती हैं। इसमें बाहरी झिल्ली सपाट तथा अन्दर वाली झिल्ली मैट्रिक्स की ओर अंगुली समान नलिकाओं (पादपों में) अथवा क्रिस्टी (जन्तुओं में) जैसी रचनाएँ बनाती हैं। क्रिस्टी की सतह पर टेनिस के रैकेट के आकार के सूक्ष्मकण होते हैं, जिसे ऑक्सीसोम कहा जाता है। इसमें ATP सिन्थेटेस एन्जाइम होता है।

माइटोकॉण्ड्रिया के मैट्रिक्स के क्रैब्स चक्र में एन्जाइम, DNA, राइबोसोम तथा RNA स्थित होते हैं, इसलिए माइटोकॉण्ड्रिया को अर्धस्वायत्त कोशिकांग (semiautonomous organelle) कहा जाता है। इसे कोशिका का बिजलीघर (powerhouse) कहा जाता है, चूंकि सभी आवश्यक रासायनिक क्रियाओं को करने के लिए माइटोकॉण्ड्रिया ATP के रूप में ऊर्जा प्रदान करते हैं।

3.अन्तःप्रद्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum)

अन्तः प्रद्रव्यी जालिका का झिल्ली युक्त नलिकाओं को एक बहुत बड़ा तन्त्र होता है। यह दोहरी झिल्ली से घिरी होती है। यह जालिका दो प्रकार की खुरदरी अन्तःप्रद्रव्यी जालिका तथा चिकनी अन्तःप्रद्रव्यी जालिका होती है।

खुरदरी अन्तःप्रद्रव्यी जालिका (rough ER) का खुरदरापन उस पर स्थित राइबोसोम के कारण हाता है। राइबोसोम पर प्रोटीन-संश्लेषण होता है। अन्तःपद्रव्यी जालिका का प्रमुख कार्य उन सभी वसाओं व प्रोटीनों का संश्लेषण करना है, जो विभिन्न कोशिका झिल्ली अथवा केन्द्रक झिल्ली का निर्माण करते है। चिकनी अन्तःप्रद्रव्यी जालिका (smooth ER) पर राइबोसोम नहीं पाए जाते हैं। ये लिपिड स्टीरॉल का संश्लेषण करती हैं।

4.गॉल्जीकाय (Golgi Body)

गॉल्जीकाय झिल्ली पुटिका है, जो एक-दूसरे के ऊपर समानान्तर रूप से रहती है। इन झिल्लियों का सम्पर्क अन्तःप्रद्रव्यी जालिका की झिल्लियों से होता है और इसलिए जटिल कोशिकीय झिल्ली तन्त्र के दूसरे भाग को बनाती है। अन्तःप्रद्रव्या जालिका में संश्लेषित पदार्थ गॉल्जीकाय में पैक किए जाते हैं और इस रूप में उसे कोशिका के बाहर तथा अन्दर विभिन्न क्षेत्रों में भेज दिया जाता है।

golgi bodies

गॉल्जीकाय को लाइपोकॉण्ड्रिया या डिक्टियोसोम भी कहा जाता है। गॉल्जीकाय को कोशिका की ट्रैफिक पुलिस भी कहा जाता है। ये कोशिका पट्ट, कोशिका भित्ति, शुक्राणु के एक्रोसोम, लयनकाय तथा हॉर्मोन के संश्लेषण का कार्य करती है।

5. लयनकाय (Lysosome)

यह मुख्यतया जन्तु कोशिकाओं में पाई जाने वाली गोल इकहरी झिल्लियों से घिरी थौलियाँ है, जिसमें 50 हाइड्रोलिटिक एन्जाइम पाए जाते हैं, जो लगभग 5pH पर कार्य करते हैं। यह कोशिका का अपशिष्ट निपटाने वाला तन्त्र है। लाइसोसोम में उपस्थित पाचनकारी एन्जाइम कार्बनिक पदार्थ को तोड़ देते हैं। लाइसोसोम को आत्महत्या की थैली (suicidal bags) भी कहा जाता है।

6. राइबोसोम (Ribosome)

यह गोलाकार, दो उप-इकाइयों के बने, झिल्ली विहीन राइबोन्यूक्लिओप्रोटीन सूक्ष्मकण होते हैं, जो हरितलवक, केन्द्रक तथा कोशिकाद्रव्य में (अन्तःप्रद्रव्यी जालिका पर राइबोफोरिन प्रोटीन द्वारा जुड़ा) पाए जाते हैं, इसे प्रोटीन की फैक्ट्री कहा जाता है। Mg+2 की कम सान्द्रता पर ये दो उप-इकाइयों में बँट जाते हैं।

7. सेन्ट्रोसोम (Centrosome)

प्रायः ये जन्तु कोशिका में पाए जाते हैं। इसके अलावा कुछ शैवालों तथा कवकों में दो जोडे सेन्ट्रियोल्स की बनी एक रचना होती है, इसलिए इसे डिप्लोसोम भी कहा जाता है। प्रत्येक सेन्ट्रियोल्स सूक्ष्मनलिकाओं से निर्मित त्रिक तन्तुओं के नौ समूहों का बना होता है, दो जोड़े सेन्ट्रियोल्स सेन्ट्रोस्फीयर या काइनोप्लाज्म से घिरे होते हैं।

इस सम्पूर्ण रचना को सेन्ट्रोसोम कहा जाता है। कोशिका विभाजन के समय सेन्ट्रोसोम के दो जोड़े सेन्ट्रियोल्स में विभाजित हो जाते हैं, जो दो विपरीत ध्रुवों पर चले जाते हैं और एस्ट्रल किरणों (astral rays) का निर्माण करते हैं।

8. रसधानियाँ (Vacuoles)

ये इकहरी झिल्ली (टोनोप्लास्ट) से घिरी तथा तरल पदार्थों से भरी रचनाएँ होती हैं। पादप कोशिका में यह बडे आकार में, जबकि जन्तु कोशिका में ये अनेक और बहुत ही छोटे आकार में होती है। इसे कोशिका का भण्डार घर कहा जाता है, जिसमें खनिज लवण, शर्करा, कार्बनिक अम्ल, O2 एवं CO2, आदि भरे होते हैं। इसमें स्थित रसधानी रस के कारण ही कोशिकाओं की स्फीति (turgidity) बनी रहती है। इसमें एक वर्णक एन्थोसायनिन पाया जाता है।

9. माइक्रोबॉडीज (Microbodies)

ये इकाई झिल्ली युक्त छोटे कोशिकांग हैं, जो ऑक्सीकरण क्रियाओं (श्वसन के अतिरिक्त अन्य) में भाग लेते हैं। इनमें क्रिस्टलीय कोर तथा कणीय मैट्रिक्स होता है। यह परॉक्सीसोम तथा ग्लाइऑक्सीसोम प्रकार का होता है।

ग्लाइऑक्सीसोम्स, ग्लाइऑक्सीसोम चक्र द्वारा वसा के ऑक्सीकरण में भाग लेता है, जबकि परॉक्सीसोम प्रकाश श्वसन में भाग लेता है। इसमें उपस्थित कैटेलेज एन्जाइम हाइड्रोजन परॉक्साइड के विघटन का कार्य करता है।

लवक (Plastids)

लवक केवल पादप कोशिकाओं में स्थित होते हैं। ये तीन प्रकार के अर्थात् हरितलवक अवर्णीलवक तथा वर्णीलवक होते हैं।

1. हरितलवक (Chloroplast)

हरे रंग का पदार्थ हरितलवक के कारण इसका रंग हरा होता है। यह हरितलवक दोहरे झिल्ली से घिरे होते हैं, जो लाइपोप्रोटीन से बनी होती है। इसके अन्दर की ओर एक तरल पारदर्शी पदार्थ होता है, जिसे स्ट्रोमा कहा जाता है। इस स्ट्रोमा में अनेक एन्जाइम, राइबोसोम, आदि पदार्थ पाए जाते हैं। माइटोकॉण्ड्रिया की तरह लवक में अपना DNA और राइबोसोम (705 प्रकार) होते हैं।

वस्तुतः इसमें बाहरी झिल्ली सपाट परन्तु भीतरी झिल्ली गोल पटलिका होती है, जिसे थायलेकॉइड कहते हैं। अनेक स्थानों पर यह थायलेकॉइड एक से ऊपर लगी होती है, जो ग्रेनम कहलाती है। ग्रेनाओं को जोड़ने वाली पटलिकाएँ स्ट्रोमा पटलिकाएँ कहलाती हैं।

थायलेकॉइड की भीतरी सतह पर क्वान्टासोम पाए जाते हैं, जिसमें हरितलवक अणु होते हैं, ये प्रकाश-संश्लेषण की आधारभूत इकाई हैं, इसे पादप कोशिका का रसोईघर कहा जाता है। हरितलवक में प्रकाश-संश्लेषण की प्रकाशिक अभिक्रिया ग्रेना में, जबकि प्रकाशहीन अभिक्रिया स्ट्रोमा में होती है।

2. अवर्णी लवक (Leucoplast)

एक रंगहीन लवक, जो जड़ों और भूमिगत तनों में पाए जाते हैं। ये स्टार्च के रूप में भोजन का संग्रह करते हैं, ये मुख्यतया तीन प्रकार के होते हैं कोशिका के भीतर उपस्थित जंक्शन प्रोटीन, ये प्रोटीन कोशिकाओं को जोड़ती है।

3. वर्णी लवक (Chromoplast)

हरे वर्णकों को छोडकर अन्य सभी वर्णी लवक क्रोमोप्लास्ट कहलाते हैं। ये पेटल्स तथा फलों में उपस्थित होते हैं। ये प्रकाश-संश्लेषण में भी भाग लेते हैं।

कोशिका के सन्धि (Junctions of Cell)

सन्धि कोशिकाओं के मध्य सम्पर्क स्थापित करने के साथ-साथ, पदार्थों के विनिमय (आवागमन) में भी सहायक है। कोशिका के कुछ सामान्य सन्धि निम्न हैं

(i) दृढ़ सन्धियाँ (Tight junctions) ये सन्धियाँ पदार्थों को ऊतक से बाहर निकलने से रोकती है; जैसे-आंत्र, वृक्क, आदि।

(ii) डेस्मोसोम्स (Desmosomes) ये दो कोशिकाओं को किरैटिन-नालक तन्तुओं द्वारा दृढता से जोड़ती है।

(iii) अन्तराली सन्धियाँ (Gap junction) ये संन्धिया निकटस्थ कोशिकाओं के कोशिकाद्रव्य को परस्पर जोड़कर उनके मध्य सम्पर्क स्थापित करती है तथा आयनों तथा छोटे अणुओं एवं कभी-कभी बड़े अणुओं को तुरन्त स्थानान्तरित करने में सहायक है; जैसे-हदय पेशियों, जन्तु भ्रूण. आदि।

 

कोशिका कंकाल व उसकी गति में भूमिका (Cytoskeleton and Its Role in Movement)

यूकैरियोटिक कोशिका के कोशिकाद्रव्य में उपस्थित लम्बे, पतले रेशों का जाल कोशिका कंकाल (cytoskeleton) कहलाता है। इसके कार्य निम्नलिखित हैं ये कोशिका के आकार को नियन्त्रित रखता है, सहारा प्रदान करता है। ये विभिन्न प्रकार की कोशिकीय गतियाँ प्रदान करता है।

(i) ये कई प्रकार की गतिशील प्रोटीन को सहारा देता है, जिससे कोशिका में विभिन्न वस्तुओं की गति सम्भव है। माइक्रोफिलामेण्ट, माइक्रोट्यूब्यूल्स, आदि कोशिका कंकाल के भाग हैं।

 

कोशिकांग, उनके खोजकर्ता एवं कार्य (Cell organelles their discoverer and functions)

कोशिकांग खोजकर्ता कार्य
हरितलवक शिम्पर प्रकाश-संश्लेषण द्वारा भोजन का निर्माण।
माइटोकॉण्ड्रिया कॉलिकर कोशिकीय श्वसन द्वारा ATP का निर्माण।
अन्तःप्रद्रव्यी जालिका पोर्टर प्रोटीन संश्लेषण (RER में) एवं लिपिड, ग्लाइकोजन तथा स्टीरॉइड संश्लेषण (SER) में
गॉल्जीकाय कैमिलो गॉल्जी शुक्राणु के एकोसोम का निर्माण, हॉर्मोन स्रावण, पदार्थों का संचय एवं स्थानान्तरण।
कोशिका भित्ति रॉबर्ट हुक मुख्यतया सेलुलोज की बनी, कैल्शियम व मैग्नीशियम पेक्टेट की बनी मध्य पटलिका कोशिकाओं के बीच सीमेन्ट का कार्य करती है।
जीवद्रव्य पुरकिन्जे जीवन की भौतिक आधारशिला।
कोशिका झिल्ली का तरल मोजैक मॉडल सिंगर एवं निकोलसन आकृति प्रदान करना व पदार्थों का आदान-प्रदान।
क्वान्टासोम पार्क एवं पोन प्रकाश-संश्लेषण की इकाई।
राइबोसोम पैलेड प्रोटीन का संश्लेषण
तारककाय टी बोवेरी कोशिका विभाजन के समय एस्टर किरणों का विकास।
लाइसोसोम डी डुबे बाह्य कोशिका पदार्थों तथा अन्तर कोशिका पदार्थों का पाचन एवं, आत्महत्या की थैली।
परॉक्सीसोम टॉल्बर्ट प्रकाश श्वसन
सूक्ष्मनलिकाएँ डी रॉर्बटिस सीलिया, कशामिका, तारककाय एवं कोशिका कंकाल का निर्माण।
केन्द्रक रॉबर्ट ब्राउन कोशिका का नियन्त्रका
केन्द्रिका फोन्टाना rRNA तथा राइबोसोम का संश्लेषण
गुणसूत्र वाल्डेयर जननिक लक्षणों का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानान्तरण।

Next… cell cycle and cell division

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