Health and Lifestyle

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Health and Lifestyle

(स्वास्थ्य और जीवन शैली)

Health (स्वास्थ्य )

‘स्वास्थ्य’ शरीर की वह अवस्था है, जिसमें शरीर शारीरिक, मानसिक एवं कार्यिकीय रूप से पूर्णतया सही होता है, जबकि रोग (disease) शरीर की वह अवस्था है, जिसमें संक्रमण, दोषपूर्ण आहार, आनुवंशिक एवं पर्यावरणीय कारणों द्वारा शरीर के सामान्य कार्यों एवं कार्यिकी में अनियमितताएँ उत्पन्न हो जाती हैं।

संक्रमण (Infection) रोगाणु (pathogen) का सुग्राही पोषी में भेदन, स्थिरीकरण तथा उसकी वृद्धि है।

रोगाणु (Pathogen) का गमन किसी अभिकर्ता (agency); जैसे-जल, भोजन तथा अन्य कारकों के द्वारा होता है। उदाहरण-मक्खियों, मच्छरों एवं कीटों द्वारा।

Lifestyle (जीवन शैली )

एक उचित जीवन शैली व्यक्ति को स्वस्थ रखने के साथ-साथ उसका अनेक रोगों से बचाव भी करती है। उचित जीवन शैली के साथ उचित एवं सन्तुलित आहार के सेवन से व्यक्ति में जरावस्था (ageing) के लक्षण विलम्ब से प्रकट होते हैं।

Diet (आहार )

आहार में प्रोटीन की उचित मात्रा कोशिका तथा आच्छादित ऊतकों के पुनरुद्भवन में सहायक है। वह आहार, जिसमें सभी पोषक तत्व उचित अनुपात में सम्मिलित होते हैं, सन्तुलित आहार कहलाता है। सन्तुलित आहार प्रत्येक व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और कार्य के अनुसार निर्धारित होता है। सन्तुलित आहार के निर्धारण के लिए भोजन सामग्रियों में कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन्स तथा वसाओं की प्रतिशत मात्राएँ तथा भोजन से इन सामग्रियों के तालमेल के लिए ग्राम में इनकी आवश्यक मात्राओं से सम्बन्धित तालिकाएँ अध्याय-13 (पोषण एवं पाचन) में दर्शायी गयी हैं।

Diet

 

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Adultration in Food Substances (खाद्य पदार्थों में मिलावट )

खाद्य पदार्थों में सस्ते, निम्न गुणवत्ता युक्त, अखाद्य एवं कभी-कभी विषैले पदार्थों का संक्रमण (मिलावट) ही खाद्य मिलावटता (adultration) कहलाती है। खाद्य पदार्थों में मिलावट से खाद्य धीमा विष बन जाते हैं तथा विभिन्न प्रकार के रोगों का कारक बन जाते हैं। मिलावट खाद्य पदार्थों को असुरक्षित एवं अशुद्ध बना देती है।

Prevention of Adulteration  (मिलावट की रोकथाम )

घी में वनस्पति घी की मिलावट की जाँच या परीक्षण मिलावटी धी को कुछ मात्रा तथा उसके बराबर सान्द्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की मात्रा को एक परखनली में मिश्रित करते हैं। इसके बाद एक चुटकी सामान्य शर्करा (चीनी) मिलाते हैं। घी में मिलावट होने पर परखनली में मिश्रण के निचली सतह पर क्रिमसन रंग उपस्थित हो जाता है।

दाल में अखाद्य वर्णक (रंग) मेटानिल येलो की मिलावट की जाँच भी, लगभग 5-10 ग्राम दाल को 5-10 मिली जल मिलाते हैं, तत्पश्चात् तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की कुछ बूंद मिश्रण में मिलाते हैं। परीक्षण में गुलाबी रंग की उपस्थिति दाल में मेटानिल येलो की पुष्टि करती है।

खाद्य तेलों में आर्जीमोन मैक्सीकान के बीजों को तेल की मिलावट की जाँच, खाद्य तेल के लगभग 5 मिली मात्रा में सान्द्र नाइट्रिक अम्ल की 2-3 बूंद मिलाने से लाल भूरा रंग प्राप्त होने पर आर्जीमोन मिलावट की पुष्टि होती है। आर्जीमोन मुक्त तेलों के सेवन से ड्रॉफ्सी बीमारी हो जाती है।

Community Health (सामुदायिक स्वास्थ्य )

मानव कल्याण में कार्यरत कुछ स्वास्थ संगठन, जो मानव रोगों की रोकथाम बचाव, टीकाकरण, आदि स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी मुहैया कराते हैं, निम्नलिखित हैं

1. विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation-WHO) इसकी स्थापना सन् 1948 में की गयी थी। यह संयुक्त राष्ट्र संघ की एजेन्सी है, जिसका मुख्यालय जेनेवा में है।

2. रेडक्रॉस (red cross) इसकी स्थापना सन् 1864 में की गयी थी। यह अन्तर्राष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय संस्थान है। इसका चिह्न लाल क्रॉस (Red cross) है, जिसका अस्पतालों, एम्बुलेन्सों तथा डॉक्टरों द्वारा प्रयोग किया जाता है।

3. यूनाइटेड नेशन्स इन्टरनेशनल चिल्ड्रन्स एमरजेन्सी फंड (United Nations International Children’s Emergency Fund-UNICEF) यह संयुक्त राष्ट्र संघ का संस्थान है। यह सारे संसार के बच्चों की देखभाल करता है।

विश्व की जनसंख्या में प्रतिवर्ष लगभग 2-3% की वृद्धि हो रही है। यदि यही वृद्धि दर निरन्तर समान बनी रहे, तब 21वीं शताब्दी में विश्व की जनसंख्या 50 खरब से अधिक होगी। एक अनुमान के मुताबिक, भारत की जनसंख्या 2050 में लगभग दोगुनी हो जायेगी। सम्पूर्ण विश्व में जनसंख्या की निरन्तर वृद्धि (जनसंख्या विस्फोट) एक चिन्तनीय विषय है। जनसंख्या विस्फोट से गरीबी बेरोजगारी, खाद्य पदार्थों की कमी, शिक्षा सम्बन्धी समस्याएँ, मकानों की समस्या एवं प्रदूषण समस्या; जैसे-हानियाँ एवं दुष्प्रभाव दिखाई देते हैं।

Reproductive Health (जननीय स्वास्थ्य )

जननीय (जननिक) स्वास्थ में जन्म दर पर नियन्त्रण की विधियाँ बाँझपन, बन्धयता, प्रयोगशाला में निषेचन, प्रक्रिया, आदि का अध्ययन करते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने यह समस्या प्राथमिकता के आधार पर ली है। भारत की उच्च, उच्चतर जनसंख्या वृद्धि के कारण देश की योजना एवं विकास अत्यन्त बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। वर्तमान में भारत की जनसंख्या लगभग 121 करोड़ है।
जनसंख्या नियन्त्रण कारक निम्न प्रकार हैं
(i) वैवाहिक आयु में वृद्धि।
(ii) प्रजनन अंगों की शिक्षा।
(iii) परिवार नियोजन की कुछ विशेष विधियों का उपयोग।

Birth Controlling Measure (जन्म नियन्त्रण उपाय )

जनसंख्या वृद्धि रोकने के लिए प्रभावकारी साधन उपलब्ध है। जन्म नियन्त्रण करने की वैज्ञानिक विधियाँ निम्न हैं।

1. Use of Contraceptives (गर्भ निरोधक वस्तुओं का प्रयोग )

गर्भ निरोधक वस्तुओं को निम्नलिखित दो विधियों द्वारा प्रयोग किया जाता है।

(i) यान्त्रिक विधियाँ (Mechanical methods); जैसे-कण्डोम, डायफ्राम, अन्तरा गर्भाशय विधि (Intra Uterine Device-UD) का प्रयोग।
(ii) रासायनिक विधियाँ (Chemical methods); जैसे-जैली, फोम, क्रीम तथा मुखीय गोलियाँ (एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्टेरॉन, माला-D)

2.Abortion ( गर्भपात )

चिकित्सकीय गर्भ समापन (Medical Termination of Pregnancy-MTP)

3. नसबन्दी या बन्ध्यकरण (Sterilisation)

(i) वेसेक्टोमी (Vesectomy) पुरुषों में नसबन्दी
(ii) ट्यूबेक्टॉमी (Tubectomy) स्त्रियों में नसबन्दी

4. प्राकृतिक उपाय ( Natural Methods)

(i) संभोग से बचे रहना।
(ii) सुरक्षित समय में संभोग करना।
(iii) शुक्राणुओं के निकलने से पहले ही लिंग को योनि से बाहर निकालना।

Test-tube Baby ( परखनली शिशु )

परखनली शिशु, एक ऐसी विधि है, जिसमें निषेचन माँ के गर्भाशय से बाहर परखनली में होता है। इस विधि में भ्रूण को 32 कोशिका अवस्था में किसी प्रतिनिधि माता (surrogate mother) के गर्भाशय में अगले विकास के लिए स्थापित किया जाता है। संसार का सर्वप्रथम परखनली बच्चा लुई जोय ब्राउन (Louis Joy Brown) नामक लड़की है, जिसका जन्म सन् 1978 में इंग्लैण्ड

Amniocentesis ( एम्निओसेन्टेसिस )

यह एक जन्म से पूर्व निदान तकनीक है, जिससे निम्न जानकारी ली जा सकती हैं
(i)बार बॉडी (Barr bodies) द्वारा विकसित होते हुए भ्रूण का लिंग जानना।
(ii) भूण में उपापचयी रोग विकारों (metabolic disorders) को जानना।
(iii) भ्रूण में आनुवंशिक त्रुटियों (genetical errors) को जानना।

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