Human Immune System

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Human Immune System

मानव प्रतिरक्षा तन्त्र 

किसी विशेष रोग के लिए शरीर सुरक्षा तन्त्र का विकास करता है अर्थात् प्रत्येक रोग के लिए पृथक् सुरक्षा तन्त्र विकसित होता है। ये सुरक्षा तन्त्र ही प्रतिरक्षी क्रियाएँ करते हैं। जन्तुओं के इस गुण को प्रतिरक्षा या प्रतिरोधकता या रोधक्षमता कहते हैं तथा जो अंग प्रतिरक्षा में भाग लेते हैं, वे संयुक्त रूप से प्रतिरक्षा तन्त्र निर्माण करते हैं। जैव विज्ञान की वह शाखा, जो प्रतिरक्षी प्रतिक्रियाओं से सम्बन्धित है, उसे प्रतिरक्षा विज्ञान या इम्यूनोलॉजी कहते हैं। वॉन बेहरिंग को प्रतिरक्षा विज्ञान का जनक माना जाता है।

Types of Immunity (प्रतिरक्षा के प्रकार )

रोगजनक आक्रमण के विरूद्ध शरीर का प्रतिरक्षण प्राकृतिक या जन्मजात अविशिष्ट प्रतिरक्षा (natural innate or non-specific immunity) अर्थात् माँ द्वारा प्रदान की गई रक्षाविधि तथा उपार्जित या विशिष्ट प्रतिरक्षा (acquired or specific immunity) अर्थात् शरीर में जीवनकाल के दौरान विकसित होने वाली होती है। उपार्जित या विशिष्ट प्रतिरक्षा सक्रिय अर्थात् शरीर में रोग पैदा होने के बाद विकसित तथा निष्क्रिय अर्थात् बाध्य स्रोत से पैदा की जाने वाली होती है।

Components of Immune System (प्रतिरक्षा तन्त्र के घटक)

मनुष्य में प्रतिरक्षा तन्त्र के मुख्य दो घटक होते हैं
(i) रुधिर प्रतिरक्षा तन्त्र (Humoral immune system) इस तन्त्र का निर्माण एण्टीबॉडीज करती हैं। ये रुधिर प्लाज्मा एवं लसिका में पाई जाती हैं।

(ii) कोशिका माध्यमित प्रतिरक्षा तन्त्र (Cell mediated immune system) यह तन्त्र शरीर में प्रत्यारोपित अंग के प्रतिकार्य करता है। ये कैंसर कोशिकाओं के विरुद्ध भी लड़ती है।

Antigen and Antibody (प्रतिजन एवं प्रतिरक्षी )

प्रतिजन वे पदार्थ है, जो प्रतिरक्षा प्रतिकिया (immune response) तीव्र कर सकते हैं। ये प्रायः प्रोटीन होते हैं और इनमें एण्टीजेनिक डिटरमिनेण्ट (antigenic determinants) पाए जाते हैं, जो विशेष प्रकार की प्रतिरक्षी (antibodies) को उत्प्रेरित करते हैं।

प्रतिरक्षी या इम्यूनोग्लोब्युलिन्स (immunoglobulins) प्रतिमा प्रतिक्रिया में बने प्रोटीन है। प्रत्येक प्रतिरक्षी में दो भारी और दो हल्की श्रृंखलाएँ होती हैं, जो एक दूसरे से डाइसल्फाइड बन्धों (S-S bonds) द्वारा जुड़ी होती है। प्रतिरक्षी अणु के परिवर्तनशील (variable) भाग में प्रतिजन को बाँधने हेतु प्रतिजन बन्धन स्थल (antigen binding site) होता है।

 

विभिन्न इम्यूनोग्लोब्युलिन वर्गों के कार्य (Functions of different immunoglobulins)

न्यूनोसोमुलिन वर्ग उपस्थिति  कार्य
IgA दूध, लार, आँसू, श्वसनी एवं आंत्रीय स्रावण निःश्वसन तथा अन्तग्रहित रोगाणुओं से सुरक्षा
IgD B-कोशिकाओं की सतह लसिकाणु की सतह पर ग्राही के रूप में उपस्थित कोशिकाओं की सक्रियता
IgE मास्ट कोशिकाओं और बेसोफिल्स की सतह प्रत्युर्जता प्रतिवेदन में मध्यावस्था
IgG माता से भ्रूण में जाने वाले रुधिर में उद्दीपन तथा गर्भ में पूरक तन्त्र की निष्क्रिय प्रतिरक्षण
IgM रुधिर और B-कोशिकाओं की सतह B-कोशिकाओं की सक्रियता

सबसे प्रचुर Ig  (IgG-मानव प्रतिरक्षियों का लगभग 75%) ऐसी प्रतिरक्षी है, जो प्लैसेण्टा को पार कर सकती है।

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रक्षा तन्त्र सम्बन्धी कोशिकाएँ (Cells Related to Immune System)

लिम्फोसाइट्स नुय एवं विशेष कोशिका होती है, जो प्रतिरक्षा तन्त्र का निर्माण करती हैं। ये कोशिकाएँ दो प्रकार की होती है

(i) B-कोशिकाएँ (B-lymphocytes)

ये अस्थि मज्जा में विकसित होकर द्वितीयक लिम्फॉइड अंगों तक पहुँच जाती हैं।

(ii) T-कोशिकाएँ (T-lymphocytes)

इनका निर्माण प्लूरीपोटेन्ट स्टेम कोशिकाओं द्वारा अस्थि मज्जा में पाई जाने वाली प्रोजेनिटर कोशिकाओं से होता है। ये रक्तीय तथा कोशिका माध्य प्रतिरक्षी प्रतिक्रियाओं में शामिल होती हैं। भूण में इन कोशिकाओं का निर्माण यकृत के द्वारा तथा वयस्कों में मज्जा (bone marrow) के द्वारा होता है। इन कोशिकाओं का थाइमस में प्रदेश अस्थि मज्जा के पश्चात् B तथा T-कोशिकाओं में विभेदन हो जाता है। ये दोनों कोशिकाएं एण्टीजन के द्वारा प्रेरित एण्टीबॉडीज का निर्माण करती है।

T-कोशिकाओं के प्रकार (Types of T-cells)

(i) प्राण घातक T-कोशिकाएँ (Killer T-cells) ये काशिकाएँ बड़ी ग्रेन्यूलर लिम्फोसाइट्स हैं। ये कोशिकाएं विषाणु, जीवाणु, कवक तथा परजीवी से बचाती है।

(ii) सहायक T-कोशिकाएँ (Helper T-cells) ये अन्य कोशिकाओं की साइटोटोक्सिसिटी (cytotoxicity) में अप्रत्यक्ष रूप से मदद करती है और प्रतिजनों द्वारा उत्तेजित किए जाने पर साइटोकाइन्स (cyotokines) उत्पन्न करती हैं, जो अन्य कोशिकाओं की वृद्धि विभाजन और प्रदर्शन को बढ़ा देता है।

(iii) अप्रभावक T-कोशिकाएँ (Suppressor T-cells) ये कोशिकाएँ एक प्रतिजन विशेष (antigen specific) ढंग से उत्तेजित होती है। ये अपना प्रभाव नकलात्मक प्रतिरक्षी प्रतिक्रिया बदलावकारी द्वारा डालती है। प्रतिरक्षी प्रणाली लिम्फॉइड अंगों तथा इनकी कोशिकाओं के उत्पादों द्वारा बनती है। प्राथमिक लिटिक अंग अस्थि मज्जा (bone marrow) तथा थायमस है, जबकि द्वितीय लिम्फेटिक अंग प्लीहा (spleen) और लिम्फ नोड है।

टीकाकरण तथा प्रतिरक्षण (Vaccination and Immunisation)

टीकाकरण तथा प्रतिरक्षण का सिद्धान्त प्रतिरक्षी तन्त्र का याद्दाश्त के ऊपर आधारित है। टीकाकरण में रोगाणुओं के या असक्रिय कमजोर रोगाणुओं के प्रतिजनित प्रोटीन को तैयार कर शरीर में प्रवेश कराया जाता है। ये प्रतिजन प्राथमिक प्रतिरक्षी तथा मैमोरी B तथा T-कोशिकाओं को उत्पादित करती हैं, जब टीकायुक्त व्यक्ति उसी रोगाणु से आक्रमित होता है, तो उपस्थित मैमोरी  या B-कोशिकाएँ प्रतिजन को तेजी से पहचान लेती है तथा आक्रमणकारी को अत्यधिक लसीकाणुओं तथा प्रतिरक्षियों से घेर लेती हैं। टीकाकरण की खोज एडवर्ड जेनर ने की थी। 1920 के अन्त में डिपथीरिया, टिटनेस, परट्यूसिस (whooping cough तथा ट्यूबरकुलोसिस के टीके प्राप्त हो गए।

शिशुओं एवं बच्चों के लिए प्रमुख टीके (Important Vaccine for Children and infants)

टीका बीमारी उम्र वर्ग सुरक्षा
बीसीजी हिपेटाइटिस एवं ट्यूबरकुलोसिस 10-14 वर्ष के सभी बच्चे 70%
डिपथीरिया डिपथीरिया, टिटनेस, काली खांसी
एवं हीमोफिलस इन्फ्यूएन्जा टाइप-B
1½, 2½ तथा  महीने की उम्र के सभी बच्चे 90-99% के बीच
हिपैटाइटिस -B हिपैटाइटिस उन सभी बच्चों को जिनकी माताएँ या
नजदीकी परिवार हिपेटाइटिस से संक्रमित हो चुके हैं।
मानक सुरक्षा प्रतिशत की पूर्ण प्रतिशता उपलब्ध नहीं
पोलियो पोलियो 1½, 2½ तथा महीने की उम्र के सभी बच्चों को DTP-Hib के साथ लगभग 100%

Health Organisation (स्वास्थ्य संगठन)

(i) विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation or WHO) इसकी स्थापना वर्ष 1948 में की गई थी। यह संयुक्त राष्ट्र संघ की एजेन्सी है, जिनका मुख्यालय जेनेवा में है।

(ii) रेड क्रॉस (Red Cross) इसकी स्थापना 1964 में की गई थी। यह अन्तर्राष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय संस्थान है। इसका चिन्ह लाल क्रॉस + है, जिसका अस्पतालों, एम्बुलेन्सों तथा डॉक्टरों द्वारा प्रयोग किया जाता है।

(iii) यूनाइटेड नेशन्स इण्टरनेशनल चिल्ड्रन्स एमरजेन्सी फण्ड (United Nations International Childern’s Emergency Fund-UNICEF) यह संयुक्त राष्ट्र का संस्थान है। यह सारे संसार के बच्चों की देखभाल करता है।

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